घर से 8 हजार लेकर निकले दो नाबालिग भाई तीसरे दिन छोटे की जिद के कारण जयपुर से वापस लौटे

बोरानाडा से सोमवार को घर से निकले दो नाबालिग भाई तीसरे दिन बुधवार को घर पहुंचे। दोनों भाई ट्रेन से बाड़मेर गए और फिर वहां से निजी बस से जयपुर पहुंचे। यहां 10 साल का छोटा भाई भावेश सिंह रोने लगा और मां के पास जाने की जिद करने लगा तो बड़ा भाई हेमंत सिंह (13) उसे रोता देख नहीं सका। दोनों जयपुर से ट्रेन में बैठ कर जोधपुर आ गए। रेलवे स्टेशन से टैक्सी किराए की। घर से पहले एक सूनी जगह रुक कर वापस दोनों ने स्कूल ड्रेस पहनी और घर पहुंचे। तीन दिन से लापता दोनों बेटों के घर पहुंचने पर परिजन खुशी से झूम उठे।



बोरानाड़ा थाना इलाके में रहने वाले दो सगे भाई सोमवार को घर में रखे आठ हजार रुपए लेकर सोमवार सुबह स्कूल समय पर निकले और वापस घर नहीं लौटे तो थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। बोरानाडा थाने के सब इंस्पेक्टर ओमप्रकाश ने बताया कि सोमवार देर शाम से ही दोनों को तलाश करना शुरू कर दिया था। ऐसे में सोमवार व मंगलवार दोनों दिन रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद पता चला कि वे बाड़मेर की ट्रेन का टिकट लेकर निकले थे। जिस पर एक टीम बाड़मेर रवाना हुई वहीं बाड़मेर के सीसीटीवी खंगाले गए तो वे बाड़मेर में ही घूमते दिखे लेकिन पुलिस उन्हें पकड़ती उससे पहले वे वहां से निजी बस से जयपुर के लिए रवाना हो गए। जयपुर के बाद हेमंत ने अहमदाबाद जाने के लिए दो टिकट भी बुक करवा दिए थे।



जैसलमेर का किला देखने का था प्लान
सोमवार को बोरानाडा इलाके में रहने वाले हेमंत सिंह व भावेश सिंह घर से स्कूल के लिए निकले थे, लेकिन वहां की बजाय इलाके में ही घूमते रहे। जैसे ही फैंसी कपड़े की दुकान खुली तो वहां से दोनों ने कपड़े खरीदे और बदल लिए। फिर सिटी बस पकड़ जालोरी गेट पहुंचे। यहां से पैदल-पैदल रेलवे स्टेशन पहुंचे। जैसलमेर का किला देखना चाहते थे, इसलिए ट्रेन से जैसलमेर जाने का पहला प्लान था।



 रेलवे स्टेशन से टैक्सी की, घर से पहले रुकवाई
दोनों भाइयों ने जोधपुर पहुंचने के बाद एक टैक्सी किराए की। घर आने से पहले ही उसे रोक दिया। दोनों के मन में मां व पिता की डांट का डर था। ऐसे में एक सुनसान जगह दोनों पहुंचे तो वहां पहने कपड़े बदलकर वापस स्कूल की ड्रेस पहनी। तभी एक व्यक्ति ने दोनों को देखा और कहा कि तुम दोनों तो लापता हो गए थे न। तो बड़ा बोला, हां घर ही जा रहे हैं।



जैसलमेर की ट्रेन नहीं मिली तो चले गए बाड़मेर 
रेलवे स्टेशन पहुंचे तो पता चला कि जैसलमेर के लिए कोई ट्रेन उस वक्त नहीं थी। बड़े ने तुरंत प्लान बदला और बाड़मेर के लिए जाने वाली ट्रेन के दो टिकट लिए। बाड़मेर घूमने के बाद वहां से जयपुर जाना तय किया।



जयपुर से अहमदाबाद, फिर दिल्ली का था प्लान 
बाड़मेर से निजी बस से दोनों जयपुर पहुंचे। जयपुर घूमने के बाद बड़े भाई हेमंत ने एक निजी ट्रेवल्स से अहमदाबाद जाने के लिए दो टिकट करवाए। अहमदाबाद घूमने के बाद उनका दिल्ली घूमने का प्लान था। दिल्ली में लाल किला देखने की तमन्ना थी।



छोटा भाई रोया, तो बदला पूरा प्लान
जयपुर से जब अहमदाबाद जाना तय हो चुका था तो घर से निकले तीसरा दिन हो चुका था इसलिए छोटा भाई भावेश भावुक हो गया। रोने लगा और मां के पास जाने की जिद करने लगा। बड़े भाई हेमंत ने उसे राजी करने के लाख जतन किए, लेकिन वो नहीं माना। बस घर जाने की बात पर अड़ा रहा। ऐसे में प्लान पूरा बदल गया और अहमदाबाद जाने की बजाय वो जयपुर रेलवे स्टेशन पहुंचे और ट्रेन से दो टिकट करवाकर जोधपुर पहुंचे।